नई दिल्ली, 14 फरवरी।
केंद्र सरकार के दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास केंद्र- सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट) ने क्वांटम सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शनिवार को सिनर्जी क्वांटम इंडिया के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों संस्थान मिलकर एक ऐसा ऑटोमेटेड टूल बनाएंगे जो उपकरणों में मौजूद उन एल्गोरिदम की पहचान करेगा जिन्हें भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से खतरा हो सकता है।
सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि सिनर्जी क्वांटम के साथ यह सहयोग भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि सी-डॉट की दूरसंचार और क्वांटम अनुसंधान विशेषज्ञता को सिनर्जी क्वांटम की क्षमताओं के साथ मिलाकर एक उपकरण तैयार किया जाएगा जो वर्तमान और भविष्य की साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य एक स्मार्ट स्कैनर तैयार करना है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के खतरों को देखते हुए किसी भी डिवाइस की सुरक्षा कमियों को उजागर करेगा और उसे सुरक्षित बनाने का मार्ग बताएगा, जिसमें वेब एप्लिकेशन, सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट और कंट्रोल सॉफ्टवेयर मॉड्यूल शामिल होंगे।
सिनर्जी क्वांटम इंडिया के सह-संस्थापक और सीईओ जय ओबेराय ने कहा कि संयुक्त रूप से विकसित यह उपकरण सरकार, रक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना क्षेत्रों में संगठनों को क्वांटम-संबंधित क्रिप्टोग्राफिक जोखिमों का आकलन और निवारण करने में सक्षम बनाएगा और क्वांटम साइबर सुरक्षा में भारत के वैश्विक नेतृत्व में योगदान देगा।
इस अवसर पर सी-डॉट की ईवीपी शिखा श्रीवास्तव, जय ओबेराय, विपिन राठी और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



