देहरादून, 20 फरवरी।
उत्तराखंड में शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े भूमि खरीद-बिक्री मामले में देहरादून जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने तथ्यों को छिपाकर भूमि उपयोग परिवर्तन (धारा 143) कराने वाले पांच लोगों की अनुमति रद्द कर दी है। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर बेची गई भूमि से जुड़े 193 लोगों को नोटिस जारी किया गया है।
विकासनगर के उपजिलाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि सभी पक्षों को नोटिस भेजकर 27 फरवरी तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है।
प्रशासन यह भी देख रहा है कि ट्रस्ट की नियमावली का पालन हुआ या नहीं और भूमि लेन-देन से ट्रस्ट को कोई वित्तीय लाभ तो नहीं मिला। जांच में यह भी देखा जाएगा कि पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से भूमि बिक्री में किसी तरह की अनियमितता या तथ्य छिपाने का प्रयास तो नहीं हुआ। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि भूमि खरीदारों से किसी न्यायिक निर्देश को छिपाया गया या नहीं।
यह ट्रस्ट महमूद मदनी द्वारा स्थापित बताया जाता है। मदनी ने इसे इस्लामिक शिक्षण संस्था (मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के लिए बनाया था। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि दिल्ली में पंजीकृत ट्रस्ट की नियमावली का उल्लंघन हुआ या नहीं, क्योंकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चेरिटेबल ट्रस्ट की भूमि बेची नहीं जा सकती। अगर बेची गई है, तो इसके लिए ट्रस्टियों की बोर्ड बैठक में लिखित स्वीकृति आवश्यक होती है और बिक्री विलेख में इसका उल्लेख करना जरूरी है।
विधि विशेषज्ञों के अनुसार, चेरिटेबल ट्रस्ट “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। ऐसे में ट्रस्ट की संपत्ति की बिक्री के लिए बोर्ड की विधिवत मंजूरी और विक्रय दस्तावेज में स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य है।



