28 फ़रवरी, हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा एम लूथरा ने कहा कि प्रत्येक छात्र को प्रतिदिन यज्ञ करना चाहिए, क्योंकि यज्ञ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा को मजबूत करता है। वे समविश्वविद्यालय की यज्ञशाला में शैक्षणिक भ्रमण पर आए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के मनोविज्ञान विभाग के छात्रों के दल को संबोधित कर रही थीं।
कुलपति ने गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने 1902 में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के प्रभाव से भारतीय युवा पीढ़ी और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया था। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत एक पुण्य भूमि है और नियमित यज्ञ करने से व्यक्ति के अंदर संस्कार विकसित होते हैं, जो व्यक्ति को वैश्विक स्तर पर भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहने में मदद करते हैं। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित प्रयोगशालाएं छात्रों के शैक्षणिक विकास में सहायक हैं। भ्रमण दल की अध्यक्ष प्रो. अल्पना अग्रवाल ने गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति को करीब से समझने के अवसर को महत्वपूर्ण बताया।



