नई दिल्ली, 12 फरवरी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले केंद्र सरकार ने वायु सेना के लिए फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दे दी है। इनमें से 18 विमान सीधे डसॉल्ट एविएशन कंपनी से आएंगे और शेष 96 विमान भारत में निजी कंपनियों के साथ साझेदारी में बनाए जाएंगे। इन विमानों में कई ट्विन-सीटर ट्रेनिंग वर्जन भी होंगे। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) से आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) मिलने के बाद व्यावसायिक वार्ता शुरू होगी और अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) देगी।
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में डीएसी की बैठक साउथ ब्लॉक में हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। केंद्र ने फ्रांस के साथ सरकार से सरकार सौदे के तहत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दी है। इन विमानों में 40-50 फीसदी मेक इन इंडिया हथियार इंटीग्रेट करने का अधिकार होगा। 3.25 लाख करोड़ रुपये का यह सौदा किसी देश के साथ हुए अब तक के अनुबंधों से कम से कम पांच गुना बड़ा है। भारत के पास पहले से 36 राफेल हैं और नए सौदे के बाद कुल 150 विमान होंगे, जिससे हवाई ताकत में कई गुना वृद्धि होगी।
वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने बताया कि ऑपरेशन 'सिंदूर' के दौरान राफेल ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले में अहम भूमिका निभाई। नए सौदे के बाद भारत के पास कुल राफेल ऑर्डर 186 जेट्स हो जाएंगे, क्योंकि नौसेना के लिए 26 राफेल-एम का 63 हजार करोड़ का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है। भारत में लगभग 100 जेट्स बनाए जाएंगे, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डसॉल्ट-टाटा पार्टनरशिप और मेक इन इंडिया को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। डिलीवरी 2030 तक होने की संभावना है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 16 जनवरी को 114 राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब डीएसी की मंजूरी के बाद अंतिम स्वीकृति प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली सीसीएस देगी और यह डील इसी माह फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे पर पक्की हो जाएगी। अंबाला एयरबेस पर राफेल फ्लाइट-ट्रेनिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधा पहले से चालू है। ये जेट्स ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम के तहत खरीदे जाएंगे, जिसमें डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय फर्म के साथ साझेदारी करेगी।



