पटना, 12 फरवरी।
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जल संसाधन विभाग समेत कई विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई। कार्यवाही शुरू होते ही सर्वेक्षित जमीन की खरीद-बिक्री और धान अधिप्राप्ति लक्ष्य को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने सवाल उठाए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक सर्वजीत ने सरकार से पूछा कि बिहार के किसानों का धान पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के व्यापारी खरीद रहे हैं, जिससे किसान कम कीमत पर धान बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जब राज्य में डबल इंजन की सरकार है तो फिर किसानों को उचित मूल्य क्यों नहीं मिल रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मंत्री का पक्ष रखते हुए कहा कि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर केंद्र सरकार से बातचीत जारी है और जल्द समाधान निकाला जाएगा।
राजद विधायक कमरेंद्र कुमार ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 45 लाख मीट्रिक टन तय किया गया था, जिसे घटाकर 36 लाख 85 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया। इस पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार से संवाद जारी है, केंद्रीय मंत्री से समय मांगा गया है और शीघ्र ही समाधान होने की उम्मीद है।
विधानसभा में जदयू विधायक मंजीत कुमार सिंह ने सर्वेक्षित जमीन की खरीद-बिक्री का मामला उठाया। बरौली विधायक मंजीत कुमार सिंह के प्रश्न पर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विशेष सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जाएगा।
मंजीत सिंह ने कहा कि राज्य में मात्र 20 प्रतिशत क्षेत्रफल का सर्वेक्षण हुआ है, इसलिए एक समय सीमा तय की जानी चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न हो।
इस पर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर दो वर्ष में सर्वेक्षण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भूमि कल्याण जन संवाद कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे लोगों को राहत मिल सके। परिमार्जन के लगभग 40 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन पर कार्रवाई जारी है। जिन मामलों में विवाद है, उनमें न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा की जाएगी, जबकि अन्य मामलों का त्वरित निष्पादन किया जा रहा है।



