नई दिल्ली, 17 फरवरी।
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कहा कि आने वाले दो वर्षों में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्र की पांचों परतों में 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है और जोखिम पूंजी कंपनियां गहन तकनीक स्टार्टअप्स, बड़े समाधान और अनुप्रयोग, अत्याधुनिक मॉडल्स पर शोध तथा बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परतों में निवेश कर रही हैं, इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जीतिन प्रसाद भी मौजूद रहे।
वैष्णव ने भारत मंडपम में आयोजित सत्र में बताया कि देश की एक बड़ी ताकत यह है कि 51 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से आती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता तथा स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता के कारण यह संभव हुआ है, जिससे एआई के लिए ऊर्जा परत में निवेश भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
उन्होंने एआई के संभावित खतरों पर ध्यान देते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बन रही है कि एआई का इस्तेमाल अच्छे कार्यों के लिए होना चाहिए और इसके हानिकारक प्रभावों को रोकना जरूरी है, इसके लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि तकनीकी और कानूनी दृष्टिकोण अपनाना होगा, और भारत का कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा संस्थान कई शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से ऐसे तकनीकी समाधान तैयार कर रहा है जो एआई के दुष्प्रभावों को रोक सकें।
एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनसन हुआंग के सम्मेलन में शामिल न होने पर वैष्णव ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से आने में असमर्थता जताई, लेकिन अपनी वरिष्ठ टीम को भेजा है और एनवीडिया भारत की कई कंपनियों के साथ मिलकर एआई ढांचा और सॉफ्टवेयर के बड़े निवेश कर रहा है।
वैष्णव ने कहा कि भारत अपने मजबूत आईटी सेक्टर में तकनीकी बदलाव को रणनीतिक रूप से संभाल रहा है और सरकार, उद्योग और शिक्षा संस्थानों के सहयोग से कर्मचारियों की प्रतिभाओं को निखारना, नई प्रतिभा तैयार करना और भविष्य की पीढ़ियों को तैयार करना प्रमुख उद्देश्य है, जिसमें एआई आधारित रीस्किलिंग और 100 से अधिक कॉलेजों में पाठ्यक्रम सुधारों के जरिए युवाओं को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।



