नई दिल्ली, 26 फरवरी।
भारतीय रेलवे को तकनीकी रूप से सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में गुरुवार को दो अहम पहल की गईं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ‘रेल टेक पॉलिसी’ के तहत समर्पित रेल टेक पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही पूर्णतः एआई आधारित डिजिटल रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (ई-आरसीटी) प्रणाली की भी शुरुआत की गई।
मंत्री ने बताया कि रेल टेक पॉलिसी का उद्देश्य स्टार्टअप्स, नवोन्मेषकों, उद्योगों और शोध संस्थानों को एक पारदर्शी एवं व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से रेलवे से जोड़ना है। अब इच्छुक स्टार्टअप्स सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी और स्वीकृति प्रणाली को सरल बनाया गया है।
नीति के तहत प्रोटोटाइप विकास और परीक्षण के लिए अधिकतम अनुदान राशि को दोगुना किया गया है, जबकि स्केल-अप अनुदान को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है। इससे नवाचार को प्रोत्साहन मिलने और रेलवे में नई तकनीकों के प्रयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रारंभिक चरण में जिन तकनीकी चुनौतियों पर काम किया जाएगा, उनमें एआई आधारित एलिफेंट इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम, कोचों में अग्नि पहचान प्रणाली, ड्रोन से टूटी रेल की पहचान, रेल तनाव निगरानी प्रणाली, पार्सल वैन में सेंसर आधारित लोड गणना उपकरण, कोचों पर सौर पैनल स्थापना तथा कोहरे में अवरोध पहचान प्रणाली शामिल हैं।
दूसरी बड़ी पहल के रूप में रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) को पूर्णतः डिजिटल और एआई सक्षम बनाया गया है। देशभर की 23 आरसीटी पीठों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। नई ई-आरसीटी प्रणाली के तहत 24×7 ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन दावा दायर किया जा सकेगा।
इस प्रणाली में केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और स्वचालित अलर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। आवेदकों को उनके मामलों की प्रगति की वास्तविक समय में जानकारी मिलेगी। मंत्री ने कहा कि एआई के उपयोग से दावों के निस्तारण में तेजी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे आम नागरिकों को त्वरित न्यायिक सुविधा मिलेगी।



