महाकौशल क्षेत्र के संभागीय स्तर के एक बड़े अधिकारी इन दिनों सफाई देते फिर रहे हैं। वजह है प्रदेश के मुखिया का हालिया दौरा कार्यक्रम। स्थानीय माननीयों की इच्छा थी कि मुख्यमंत्री के साथ उनके नाम भी बड़े-बड़े होर्डिंग में चमकें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन साफ कहती है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के अलावा बाकी नाम शासकीय खर्च से प्रचार में नहीं आएंगे। अधिकारी यही नियम समझाते रहे, लेकिन स्थानीय दबाव भी कम नहीं था।
कार्यक्रम हुआ, होर्डिंग लगे, प्रचार भी हुआ, लेकिन अब कार्यक्रम खत्म होते ही साहब को धमकियां मिल रही हैं कि नाफरमानी भारी पड़ेगी। साहब हर जगह यही सफाई दे रहे हैं कि उन्होंने तो माननीय न्यायालय के निर्देशों का पालन किया है, किसी से कोई निजी बैर नहीं। अब सबकी नजर आने वाली तबादला सूची पर है—देखना है नियम भारी पड़ते हैं या नाफरमानी।



