नई दिल्ली, 20 फरवरी।
दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विज्ञान आधारित एआई गवर्नेंस प्रगति को रोकने वाला नहीं बल्कि समाधान का एक्सीलरेटर है और यदि एआई के लिए साझा वैश्विक मानक नहीं बने तो नियमों का “पैचवर्क” तैयार होगा, जिससे लागत बढ़ेगी, सुरक्षा कमजोर होगी और असमानताएं गहरी होंगी।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट और भरोसेमंद नियम व्यवसायों को सही दिशा देते हैं और नवाचार को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, वहीं विज्ञान आधारित शासन प्रगति को रोकता नहीं बल्कि इसे सुरक्षित, निष्पक्ष और व्यापक रूप से साझा करने योग्य बनाता है।
गुटेरेस ने आगाह किया कि एआई के प्रभाव से बच्चों की सुरक्षा, श्रम बाजार और बड़े पैमाने पर हेरफेर के जोखिम का समय पर आकलन जरूरी है ताकि नागरिकों की रक्षा और निवेश सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग चुनौतीपूर्ण हो गया है, विश्वास कमजोर हुआ है और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिसके कारण अलग-अलग देशों में असंगत नीतियां और मानक लागू हैं, जिससे वैश्विक विभाजन बढ़ेगा।
महासचिव ने उदाहरण दिया कि साझा बेंचमार्क तय होने पर दिल्ली का स्टार्टअप भी वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास से काम कर सकता है और सुरक्षा मानक तकनीक के साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि निर्णय इंसान ही ले, लेकिन विज्ञान मार्गदर्शन प्रदान करे, खासकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे न्याय, स्वास्थ्य और ऋण में मानवीय निगरानी जरूरी है।
गुटेरेस ने कहा कि कम प्रचार, कम भय और अधिक तथ्य व सबूत के साथ एआई को सतत विकास लक्ष्यों के लिए विश्वसनीय इंजन बनाया जा सकता है और ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो उतनी ही स्मार्ट हों जितनी तकनीक को दिशा देना चाहती हैं।



