संपादकीय
14 Mar, 2026

ज़हर बनता भोजन: जब दूध भी सुरक्षित नहीं रहा

गोदावरी में मिलावटी दूध से हुई मौतों ने खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्वरित जांच, सख्त कानून और जागरूक समाज ही सुरक्षित भोजन सुनिश्चित कर सकते हैं।

भारत में दूध को जीवन, पोषण और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। घर-घर में यह विश्वास होता है कि दूध पीने से बच्चों की हड्डियां मजबूत होंगी, शरीर को कैल्शियम मिलेगा और स्वास्थ्य बेहतर होगा। लेकिन जब यही दूध जहर बन जाए और लोगों की जान लेने लगे, तब यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन जाता है। आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले के लालचेरुवीयू क्षेत्र में हाल ही में हुई घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है, जहां मिलावटी दूध पीने से 13 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक परिवारों के लोग बीमार पड़ गए। गांव के लोगों में अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और घबराहट जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। जांच के दौरान यह पाया गया कि प्रभावित लोगों के शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ था। इसका मतलब साफ है कि दूध में किसी जहरीले या रासायनिक पदार्थ की मिलावट की गई थी। दूध में मिलावट का यह कोई पहला मामला नहीं है। कई बार दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक रसायन और स्टार्च जैसी चीजें मिलाई जाती हैं ताकि दूध ज्यादा गाढ़ा और अधिक मात्रा में दिख सके।
लेकिन ऐसी मिलावट केवल आर्थिक लाभ के लिए की जाती है, जबकि इसका परिणाम बेहद खतरनाक होता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों के लिए यह सीधे मौत का कारण बन सकता है। इस घटना के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और डेयरी संचालक को गिरफ्तार करने की बात भी कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल एक व्यक्ति को पकड़ लेने से समस्या खत्म हो जाएगी? देश में खाद्य मिलावट का नेटवर्क इतना बड़ा हो चुका है कि यह केवल किसी एक डेयरी या व्यापारी तक सीमित नहीं है। बरसों से खाद्य विभाग द्वारा जांच की जाती रही है। सैंपल लिए जाते हैं, उन्हें प्रयोगशाला भेजा जाता है और महीनों बाद रिपोर्ट आती है। तब तक न तो उत्पाद बाजार से हटता है और न ही दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होती है। परिणाम यह होता है कि मिलावटखोरों के हौसले और बढ़ जाते हैं।
आज केवल दूध ही नहीं, बल्कि दूध से बनने वाले उत्पाद—दही, पनीर, मक्खन और घी—भी मिलावट की चपेट में हैं। यही नहीं, खाने के तेल, मसाले, मिठाई और रोजमर्रा की अन्य खाद्य सामग्री में भी नकली और मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। आम आदमी बाजार से जो भी सामान खरीदता है, उसे भरोसा होता है कि वह सुरक्षित होगा। लेकिन जब हर खाद्य पदार्थ पर शक होने लगे तो यह समाज के लिए गंभीर स्थिति है। स्वास्थ्य पर इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है—किडनी की बीमारी, पेट के रोग, कैंसर और अन्य गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं।
इस समस्या का समाधान केवल जांच या छापेमारी से नहीं होगा। इसके लिए सख्त और त्वरित कार्रवाई की जरूरत है। मिलावट करने वालों के खिलाफ कठोर कानून लागू करने होंगे और उन्हें ऐसा दंड देना होगा जो दूसरों के लिए उदाहरण बने। साथ ही खाद्य परीक्षण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना होगा। आज तकनीक के युग में ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिससे तुरंत जांच हो सके और दोषी को तत्काल सजा मिले। स्थानीय प्रशासन, खाद्य विभाग और जनप्रतिनिधियों को भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी जागरूक होना होगा। दूध और अन्य खाद्य पदार्थ विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदने चाहिए। यदि किसी उत्पाद में गंध, रंग या स्वाद असामान्य लगे तो तुरंत शिकायत करनी चाहिए। आज जरूरत इस बात की है कि भोजन को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर काम करें, क्योंकि भोजन जीवन देता है, लेकिन यदि वही भोजन जहर बन जाए तो यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि पूरे समाज के भविष्य का संकट बन जाता है।
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आज का राशिफल

पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहे। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-1-4-6

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