डॉ. मोहन यादव सरकार में लंबे समय से कई जिलों में कलेक्टर और संभागों में कमिश्नर रह चुके कुछ नौकरशाह इन दिनों प्रमोशन के बाद तबादले की उम्मीद में बैठे हैं। पहले कहा गया नया साल आएगा तो मौका मिलेगा, फिर विधानसभा सत्र के बाद की चर्चा चली, अब उम्मीद होली के बाद तक टिकी है।
इंतजार की इस लंबी कहानी में कुछ साहब सीधे तो नहीं, लेकिन माध्यमों से यह संदेश जरूर पहुंचा रहे हैं कि मौका मिला तो दिखा देंगे कि हममें कितना दम है। दरअसल कई नौकरशाह लंबे समय से कलेक्टरी की बाट जोह रहे हैं और अब उनके मन में वही पुराना गीत गूंज रहा है—बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते, इंतहा हो गई इंतजार की।



