10 मार्च, तेहरान, ईरान
ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान से जुड़े युद्ध के अंत का फैसला केवल तेहरान ही करेगा, अमेरिका नहीं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने स्पष्ट किया कि अब क्षेत्र की स्थिति और समीकरण ईरान की सशस्त्र सेनाओं के नियंत्रण में हैं, और अमेरिकी सेना इस युद्ध का अंत तय नहीं कर सकती।
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध “जल्द समाप्त” हो जाएगा। इसके जवाब में आईआरजीसी ने बयान जारी करते हुए कहा कि युद्ध कब समाप्त होगा, इसका निर्णय ईरान ही करेगा। संगठन के अनुसार क्षेत्र का भविष्य और रणनीतिक समीकरण अब ईरानी सेनाओं के हाथ में हैं।
कुछ समय बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ऐसा कोई कदम उठाता है जिससे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो अमेरिका उसे अब तक किए गए हमलों से बीस गुना अधिक कड़ा जवाब देगा।
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ऐसे लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकता है जिनके खत्म होने के बाद ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से खड़ा होना बेहद मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि ऐसी स्थिति पैदा न हो। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह कदम चीन सहित उन देशों के लिए फायदेमंद होगा जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते भारी मात्रा में तेल का आयात करते हैं।
ईरान में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल की कीमतें वर्ष 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गईं। यह स्थिति उस समय और स्पष्ट हुई जब ईरान ने अपने नए कड़े रुख वाले सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह मोज़तबा खामेनेई का चयन किया। निवेशकों ने इसे संकेत माना कि ईरान संघर्ष से पीछे हटने के बजाय अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
हालांकि बाद में तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई और अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेजी देखी गई। इसका कारण यह उम्मीद रही कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध शायद अधिक लंबा नहीं चलेगा।
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में ईरान से जुड़े युद्ध सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि पुतिन ने खाड़ी देशों के नेताओं और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़िशकियन से बातचीत के बाद इस संघर्ष के जल्द राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।
तेल आपूर्ति पर बढ़ता खतराईरान से जुड़े संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को प्रभावित किया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया भर के देश हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में जुटे हैं, क्योंकि इसी मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनका देश और उसके सहयोगी राष्ट्र इस जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए एक रक्षात्मक मिशन पर काम कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने के बाद उसके नियंत्रण वाले इलाके के आसपास लगभग दस जहाजों पर हमले हुए हैं। यह कदम अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में उठाया गया बताया जा रहा है।
वैश्विक शिपिंग कंपनी एमएससी ने घोषणा की है कि वह खाड़ी क्षेत्र से कुछ निर्यात शिपमेंट अस्थायी रूप से रोक रही है, जिसके कारण कई जहाजों से सामान उतारा जा रहा है।
बहरीन के अल मआमीर तेल संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद वहां की सरकारी ऊर्जा कंपनी बापको ने कुवैत और कतर की कंपनियों के साथ मिलकर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है। इसका अर्थ है कि नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण वे अपने निर्यात लक्ष्य पूरे करने में असमर्थ हो सकते हैं।
इस बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी कि देश के पूर्वी हिस्से में, संयुक्त अरब अमीरात की सीमा के पास स्थित एक तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया।



