मध्य प्रदेश
12 Feb, 2026

कृषक कल्याण वर्ष-2026: नरसिंहपुर और रतलाम में कृषि रथ से किसानों को मिल रही नई तकनीक की जानकारी

कृषक कल्याण वर्ष-2026 में नरसिंहपुर और रतलाम के किसानों को कृषि रथ से ई-टोकन उर्वरक, जैविक खेती, पराली प्रबंधन और आधुनिक यंत्रों की जानकारी मिल रही है।

राज्य शासन के निर्देश पर कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत प्रदेश में कृषि रथों का भ्रमण लगातार जारी है। इसी कड़ी में नरसिंहपुर जिले के सभी छह विकासखंडों में कृषि रथ संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से किसानों को ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण), आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत खेती की तकनीकों सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के जरिए किसानों को जागरूक करने का अभियान भी चलाया जा रहा है।

कृषि रथ के जरिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन, विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली के तहत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन की जानकारी किसानों को दी गई। नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर और रीपर कम बाइंडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की तकनीकी जानकारी भी प्रदान की गई।

किसानों को बताया गया कि सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे उपकरण खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बुआई का कार्य एक साथ करते हैं। इनके उपयोग से समय और लागत दोनों की बचत होती है तथा उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। साथ ही किसानों को समझाइश दी गई कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए अवशेषों को जलाने के बजाय खाद के रूप में उपयोग करना अधिक लाभकारी है।

रतलाम जिले में भी कृषि रथ के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, आत्मा परियोजना और मत्स्य पालन से जुड़े विषयों पर किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। कृषि रथ द्वारा विभिन्न गांवों में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, पराली न जलाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना तथा ई-विकास प्रणाली के तहत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है।

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