11 मार्च।
इतिहास के पन्नों में 12 मार्च का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जाता है। इसी दिन वर्ष 1930 में महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा की शुरुआत की थी, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक ऐतिहासिक चुनौती बन गई।
दांडी यात्रा करीब 24 दिनों तक चली और गुजरात के तटीय गांव दांडी पहुंचकर समाप्त हुई। वहां गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक कानून को तोड़ा। यह आंदोलन नमक सत्याग्रह के नाम से प्रसिद्ध हुआ और अंग्रेजी शासन के खिलाफ असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
उस समय ब्रिटिश सरकार ने नमक उत्पादन और बिक्री पर कर लगा रखा था, जिससे आम जनता को आर्थिक बोझ झेलना पड़ता था। गांधीजी की इस पहल ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और पूरे देश में लोग ब्रिटिश नमक कानून का विरोध करने लगे।
दांडी मार्च के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़कर विरोध प्रदर्शन किया। इतिहासकारों का कहना है कि दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप दिया और ब्रिटिश साम्राज्य को खुली चुनौती दी, जिसे कहा जाता था कि उसके साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता।



