पंजाब, 13 मार्च 2026।
देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों में से एक थे पंजाब के अमर सपूत शहीद ऊधम सिंह। उनकी अदम्य वीरता, दृढ़ संकल्प और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन्हें अमिट स्थान दिलाया।
1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार ने ऊधम सिंह के मन में अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिशोध की आग जगा दी। इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार तत्कालीन पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर को दंडित करने का संकल्प उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।
वर्षों तक अवसर की प्रतीक्षा करने के बाद ऊधम सिंह लंदन पहुंचे और 13 मार्च 1940 को कैक्सटन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान माइकल ओ’डायर पर गोलियां चलाकर जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों का बदला लिया। इस साहसिक कदम ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की दृढ़ता और बलिदान को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपने प्राणों की परवाह नहीं की। उनके अदम्य साहस और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनका नाम सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। ऊधम सिंह का जीवन और त्याग आज भी भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है।



