मुंबई, 18 फरवरी।
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की वनभूमि और पुरानी म्हाडा इमारतों के पुनर्विकास को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। गृहनिर्माण राज्यमंत्री पंकज भोयर ने कहा कि वन भूमि पर बसे लोगों के पुनर्वास और म्हाडा की जर्जर इमारतों के रीडेवलपमेंट का समाधान जल्द निकाला जाएगा।
मंत्रालय स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में भाजपा एमएलसी प्रवीण दरेकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। दरेकर ने कहा कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वर्षों से रह रहे आदिवासी पाडों को अतिक्रमण नहीं माना जाना चाहिए। इन बस्तियों में अब तक पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। उन्होंने मांग की कि आदिवासियों का पुनर्वास उसी क्षेत्र की सरकारी जमीन पर किया जाए।
बताया गया कि केतकीपाड़ा और आसपास के इलाकों में करीब 80 हजार लोग निवास करते हैं। बस्तियां बसने के बाद जमीन पर ‘निजी वन’ का आरक्षण लागू होने से पुनर्विकास कार्य अटका हुआ है। इन जमीनों को संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
वहीं, मुंबई की 388 म्हाडा इमारतों के पुनर्विकास के मुद्दे पर दरेकर ने कहा कि डीसीपीआर 2034 की धारा 33(24) लागू होने के बावजूद कम भू-क्षेत्र और अधिक आबादी के कारण परियोजनाएं व्यवहार्य नहीं बन पा रही हैं। उन्होंने 51 प्रतिशत सहमति की शर्त हटाकर म्हाडा के माध्यम से सक्षम विकासक नियुक्त कर पुनर्विकास कराने का सुझाव दिया।


