लंदन, 10 फ़रवरी।
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने दुनिया भर के देशों, खासकर मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे तालिबान पर दबाव डालें और उनके साथ सामान्य कूटनीतिक रिश्ते बनाने से बचें। मलाला ने अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की मौजूदा स्थिति को बेहद खतरनाक बताया। उनका कहना है कि तालिबान सुनियोजित तरीके से लड़कियों और महिलाओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित कर रहा है।
पाकिस्तान के दुनिया न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मलाला ने यह आग्रह एक प्राइवेट टीवी चैनल के साथ विशेष साक्षात्कार में किया। उन्होंने कहा, "तालिबान लड़कियों को पढ़ाई के बुनियादी अधिकार से दूर कर रहा है। स्कूल बंद हैं, लेकिन अफगान लड़कियों ने हार नहीं मानी। वे लुके-छुपे स्कूलों और ऑनलाइन लर्निंग के जरिए पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।"
मलाला ने बताया कि तालिबान की पाबंदियों के कारण महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पातीं और काम नहीं कर सकतीं, जिससे अफगान बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने तालिबान के प्रतिबंधों की निंदा करते हुए इसे इस्लाम की शिक्षा के खिलाफ बताया। उनका कहना है, "किसी भी लड़की को धर्म के नाम पर पढ़ाई से दूर नहीं किया जाना चाहिए। सीखना धर्म का हिस्सा है और तालिबान को अपने धर्म को सही ढंग से समझने की जरूरत है।"
मलाला ने पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों सहित सभी देशों से मानवाधिकारों के आधार पर काम करने और तालिबान के गैर-इस्लामिक कार्यों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने अफगान लड़कियों के लिए अपना समर्थन दोहराया और कहा कि वे उनके साथ खड़ी हैं और उनके लिए शैक्षणिक परियोजनाओं का समर्थन जारी रखेंगी।



