नई दिल्ली, 07 मार्च 2026।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद विदेश मंत्रालय ने थाईलैंड में फंसे 6 भारतीय श्रमिकों में से 4 को सुरक्षित तरीके से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों के बाद शुरू की गई थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 20 फरवरी को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा था, जिसमें थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक स्थित एक फैक्ट्री में कई महीनों से बंधक बनाए गए भारतीय श्रमिकों को जल्द मुक्त कराने का आग्रह किया गया था।
इसके बाद विदेश मंत्रालय के दक्षिणी प्रभाग ने थाईलैंड के अधिकारियों से संपर्क कर श्रमिकों को मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही उस फैक्ट्री के मालिक से भी बातचीत की गई, जहां ये श्रमिक काम कर रहे थे। मंत्रालय की त्वरित कार्रवाई के बाद 6 में से 4 श्रमिकों को तत्काल भारत भेजा गया, जिसका पूरा खर्च उनके नियोक्ता ने उठाया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बाकी बचे दो श्रमिकों की स्वदेश वापसी के लिए थाईलैंड के आव्रजन अधिकारियों से संपर्क जारी है, क्योंकि वे अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक वहां रुके हुए थे।
जानकारी के अनुसार 17 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के श्रमिकों ने अपनी पीड़ा बताई थी। इन श्रमिकों को बैंकॉक के पास स्थित प्लाईवुड फैक्ट्री में उनके मालिक द्वारा बंधक बनाकर रखा गया था और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी।
श्रमिकों को बिना वेतन और उचित भोजन के प्रतिदिन लगभग 12 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे उनकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। इस मामले में भारत सरकार की सक्रिय पहल के कारण श्रमिकों को राहत मिली है।



