नई दिल्ली, 09 मार्च।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
लोकसभा और राज्यसभा में ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर अपने वक्तव्य में जयशंकर ने बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में इज़राइल और अमेरिका एक तरफ हैं और दूसरी तरफ ईरान है, जबकि कई खाड़ी देशों पर भी हमले हुए हैं। इस संघर्ष में भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की बैठक हुई, जिसमें क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा तथा व्यापार, आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की गई। समिति ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भारतीय यात्रियों और छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर मौजूद हैं। यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बड़े व्यापारिक हितों के लिए भी अहम है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले दशक में इस क्षेत्र से भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी निवेश हुआ है और सप्लाई चेन में रुकावटें गंभीर चिंता का विषय हैं।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार ने जनवरी से ईरान के लिए यात्रा संबंधी परामर्श जारी किया था और भारतीय नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई। संघर्ष के दौरान भारतीय दूतावास ने छात्रों और व्यापारिक लोगों को सुरक्षित निकासी में मदद की है। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे ट्रांजिट केंद्रों में फंसे यात्रियों की सहायता की गई और अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट चुके हैं।
जयशंकर ने कहा कि ईरान के अनुरोध पर उसके पोत आईरिस लावन को 4 मार्च को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी गई, जहाज के चालक दल को भारतीय नौसैनिक सुविधाओं में रखा गया और ईरान ने भारत का आभार व्यक्त किया।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार की नीति तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है—क्षेत्र में शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थन, पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, और भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए तनाव कम करने की अपील की।



