मंत्रालय में लंबे समय से जमे एक वरिष्ठ नौकरशाह इन दिनों “फुल फ्लैश पावर” मिलने के इंतजार में हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे समय ही ठहर गया हो। किस्मत ने भी खेल खेला कि पूरी ताकत वाली कुर्सी मिलने से पहले बस इंतजार ही नसीब हुआ। हाल ही में जब एक वरिष्ठ अधिकारी अवकाश पर गए, तब उन्हें प्रभार संभालने का अवसर मिला। उन्होंने सोचा कि अब काम दिखाने का समय आ गया है, लेकिन कुर्सी संभालते ही क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की समस्याएँ सामने आ गईं।
हर कोई उनसे कह रहा था—“साहब, मौका मिला है तो हमारी भी सुन लो सरकार।” हालांकि, साहब अच्छी तरह जानते हैं कि काम सिस्टम के माध्यम से होता है, किसी के सीधे हस्तक्षेप से नहीं। इसलिए प्रभार मिलने के बावजूद वे सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं। उनकी यह सोच है कि काम दिखाने के चक्कर में कोई गलती भारी न पड़ जाए।



