16 फरवरी।
भारत में अभी तक फाइटर जेट इंजन बनने की योजना परवान नहीं चढ़ने के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को बेंगलुरु में गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट के कार्यक्रम में कहा कि अब हमें भविष्य की ओर देखना होगा और केवल 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते, इसलिए 6वीं पीढ़ी की उन्नत तकनीकों का विकास जल्द से जल्द शुरू करना होगा क्योंकि दुनिया में टेक्नोलॉजी बदल रही है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों का प्रयोग बढ़ रहा है और हमें उनमें आगे रहना होगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नागरिक उड्डयन का विस्तार तेजी से होगा और भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है, इसलिए भविष्य में नागरिक उड्डयन में किए जा रहे प्रयोग सीधे उपयोगी साबित होंगे। जब हम डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और इंजन डेवलपमेंट की बात करते हैं, तो इसका महत्व सिर्फ सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं है और किसी भी कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी अहमियत उसके दूर तक फैलने वाले नतीजों में होती है।
रक्षा मंत्री ने विमानन क्षेत्र के वैज्ञानिकों से कहा कि जो तकनीक आज लड़ाकू विमानों के लिए विकसित की जा रही है, वही कल सिविल एविएशन में क्रांति ला सकती है, और जो हाई टेम्परेचर सहने वाले कम्पोजिट मटीरियल बन रहे हैं, वे पावर प्लांट या स्पेसशिप में भी काम आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लगते हैं, तो भारत की रणनीतिक जरूरतें और महत्वाकांक्षाएं ऐसी हैं कि आपके पास केवल 5 साल हैं, और हमें इसी समय में वह कर दिखाना है जो दूसरे 20 साल में करते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि फिलहाल ब्रिटेन के साथ एयरो इंजन विकास के लिए संयुक्त अध्ययन किया जा रहा है और फ्रांस के साथ भी राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन के तहत कार्य शुरू हो चुका है, जिससे नई तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा और पहले दशकों में सामने आई चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल पर नजर रखे हुए है और देश साझेदारी करना चाहते हैं, इसलिए इन अवसरों का लाभ उठाकर अपनी तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।



