नई दिल्ली, 24 फरवरी।
ज्वेलरी निर्माण क्षेत्र की कंपनी पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी लिमिटेड का 380 करोड़ रुपये का आईपीओ मंगलवार से निवेशकों के लिए खुल गया। निवेशक इसमें 26 फरवरी तक आवेदन कर सकेंगे। शेयरों का आवंटन 27 फरवरी को संभावित है, जबकि 2 मार्च को शेयर निवेशकों के डीमैट खातों में क्रेडिट किए जाएंगे। कंपनी के शेयर 4 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।
आईपीओ खुलने के पहले दिन दोपहर 12 बजे तक इसे महज 0.05 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला था। इश्यू के लिए 367 से 386 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है। न्यूनतम लॉट साइज 32 शेयर का है। इस तरह खुदरा निवेशकों को कम से कम 12,352 रुपये निवेश करने होंगे। रिटेल निवेशक अधिकतम 16 लॉट यानी 512 शेयरों के लिए 1,97,632 रुपये तक निवेश कर सकते हैं।
इश्यू के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 98,44,559 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। कुल इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्यूआईबी के लिए आरक्षित है, जिसमें 44.94 प्रतिशत एंकर निवेशकों के लिए है। रिटेल निवेशकों के लिए 10 प्रतिशत और एनआईआई के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है।
आईपीओ खुलने से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 170.58 करोड़ रुपये जुटाए। 16 एंकर निवेशकों को 386 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 44.19 लाख शेयर आवंटित किए गए। टाटा इंडिया कंज्यूमर फंड ने 40 करोड़ रुपये का निवेश कर 10.36 लाख शेयर खरीदे। टाइगर स्ट्रेटजीज फंड ने 24 करोड़ और सेजवन फ्लैगशिप ग्रोथ फंड ने 20 करोड़ रुपये निवेश किए। इसके अलावा ग्रो म्युचुअल फंड, सिटी ग्रुप ग्लोबल और सोसायटी जनरल जैसे निवेशक भी शामिल रहे।
वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का शुद्ध लाभ 2022-23 में 51.75 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में घटकर 42.41 करोड़ रुपये रह गया। 2024-25 में लाभ बढ़कर 59.47 करोड़ रुपये पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर 2025) में कंपनी 20.13 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमा चुकी है।
राजस्व में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2022-23 में 199.35 करोड़ रुपये का राजस्व रहा, जो 2023-24 में घटकर 196.24 करोड़ रुपये हो गया। 2024-25 में यह बढ़कर 259.11 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। चालू वर्ष की पहली छमाही में कंपनी 157.12 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर चुकी है।
कंपनी पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। 2023-24 तक कंपनी कर्जमुक्त थी, लेकिन 2024-25 में 90.65 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। सितंबर 2025 तक यह बढ़कर 130.25 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि रिजर्व और सरप्लस में सुधार हुआ है और यह 98.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
ईबीआईटीडीए 2022-23 में 68.73 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में घटकर 56.14 करोड़ रुपये रह गया। 2024-25 में यह बढ़कर 79.61 करोड़ रुपये हो गया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ईबीआईटीडीए 30.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।



