05 मार्च।
आज के समय में जब नई पीढ़ी के रिश्ते पहले की तुलना में अधिक जटिल और भावनात्मक होते जा रहे हैं, ऐसे दौर में 6 मार्च 2026 को रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ इन्हीं रिश्तों की अनकही भावनाओं को सामने लाने की कोशिश करती है। विपुल धवन और पूजा अरोड़ा के प्रोडक्शन में बनी तथा विकास अरोड़ा के निर्देशन में तैयार यह फिल्म एक संवेदनशील रिलेशनशिप ड्रामा है, जो प्यार, दूरी और कम्युनिकेशन गैप जैसे विषयों को बारीकी से प्रस्तुत करती है।
कहानी
प्यार की शुरुआत अक्सर हल्की, खूबसूरत और बेफिक्र होती है, जहां छोटी-छोटी नोकझोंक, हंसी-मजाक और मासूमियत रिश्ते की पहचान बनती है। लेकिन समय के साथ रिश्तों में जिम्मेदारियां, अपेक्षाएं और अहंकार भी अपनी जगह बनाने लगते हैं। फिल्म की कहानी कौशल (जतिन सरना) और टीना (मधुरिमा रॉय) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ही ऑफिस में काम करते हुए दोनों के बीच प्यार पनपता है और जल्द ही यह रिश्ता शादी में बदल जाता है। शुरुआत में सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन धीरे-धीरे कौशल अपने करियर और पैसों की दौड़ में इतना व्यस्त हो जाता है कि टीना खुद को अकेला महसूस करने लगती है। बाहर से उनका रिश्ता सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर भावनात्मक दूरी लगातार बढ़ती जाती है। इसी दौरान टीना की जिंदगी में एक तीसरे व्यक्ति (प्रणय पचौरी) की एंट्री होती है, जो कहानी को नया मोड़ देती है। आगे की कहानी इसी मोड़ के साथ दिलचस्प बनती जाती है।
परफॉर्मेंस
जतिन सरना ने कौशल के किरदार को सादगी और सच्चाई के साथ निभाया है। उनके अभिनय में एक ठहराव दिखाई देता है, जो किरदार की जटिलता को प्रभावी ढंग से उभारता है। खासतौर पर भावनात्मक दृश्यों में उनकी पकड़ मजबूत नजर आती है। मधुरिमा रॉय टीना के किरदार में बेहद सहज और स्वाभाविक लगती हैं। उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति इस भूमिका को वास्तविक बनाती है। वहीं प्रणय पचौरी की एंट्री फिल्म में एक नया एंगल और ताजगी लेकर आती है और वे अपने किरदार में प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पहलू
निर्देशक विकास अरोड़ा ने फिल्म को ओवरड्रामा से दूर रखते हुए इसे वास्तविक और दर्शकों से जुड़ा रखने का प्रयास किया है। हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म की गति धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन यह धीमापन कहानी की भावनात्मक गहराई को और उभारता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की बड़ी ताकत बनकर सामने आती है, जहां उत्तराखंड की लोकेशनों को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। संगीत भी कहानी के साथ अच्छी तरह तालमेल बिठाता है और रेखा भारद्वाज की आवाज में गाया गया टाइटल ट्रैक विशेष प्रभाव छोड़ता है।
फाइनल टेक
‘ना जाने कौन आ गया’ केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा आईना है जो दिखाता है कि कैसे लोग अपने ही रिश्तों में धीरे-धीरे दूर होते चले जाते हैं। यह फिल्म याद दिलाती है कि रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, समय देने और भावनात्मक रूप से जुड़े रहने से मजबूत होते हैं। कुल मिलाकर यह फिल्म आधुनिक रिश्तों की उस सच्चाई को सामने लाती है, जिससे आज की नई पीढ़ी आसानी से जुड़ाव महसूस कर सकती है।



