इतिहास, 19 फ़रवरी।
साल 1630 में शिवनेरी किले में जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने “हिंदवी स्वराज” का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए संगठित प्रयास किए, उनकी माता जिजाबाई ने उनमें धर्म, नीति और प्रजा-कल्याण के संस्कार डाले, जबकि गुरु दादोजी कोंडदेव ने प्रशासन और युद्धकला का प्रशिक्षण दिया।
शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति को प्रभावी ढंग से अपनाकर बड़ी सेनाओं को चकमा दिया। पहाड़ी किलों का रणनीतिक उपयोग, तेज आक्रमण और त्वरित वापसी उनकी विशेष पहचान बनी। अफजल खान पर उनकी निर्णायक विजय और मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के साथ संघर्ष उनके साहस और कूटनीति को दर्शाता है।
उन्होंने सुव्यवस्थित राजस्व प्रणाली, सक्षम नौसेना और किलों के सुदृढ़ नेटवर्क का विकास किया। किसानों और महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और स्थानीय भाषा-प्रशासन को बढ़ावा देना उनकी शासन-नीति के प्रमुख स्तंभ थे। 1674 में उनका राज्याभिषेक मराठा शक्ति के उत्थान का प्रतीक बना। शिवाजी महाराज आज भी राष्ट्रनिर्माण, स्वाभिमान और जनकल्याणकारी नेतृत्व के आदर्श के रूप में स्मरण किए जाते हैं।



