नई दिल्ली, 27 फरवरी 2026।
उच्चतम न्यायालय ने झूठी शिकायतों के आधार पर दर्ज होने वाले आपराधिक मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आपराधिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि झूठे मामलों के कारण न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।
यह याचिका भारतीय जनता पार्टी नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि फर्जी शिकायतों के कारण ईमानदार नागरिक भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। ऐसे मामलों के कारण न्यायालयों पर बोझ बढ़ रहा है और कई बार दीवानी विवादों को आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है। जमीन विवाद होने पर एससी-एसटी कानून जैसे गंभीर आरोप भी लगा दिए जाते हैं। कुछ मामलों में महिलाओं को आगे करके छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसे झूठे मामले दर्ज कराने का भी उल्लेख किया गया।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कई बार जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है, उसे इसकी जानकारी भी नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोग फर्जी हस्ताक्षर के जरिए कमजोर वर्गों का शोषण कर सकते हैं। हाल ही में एक महिला ने स्वयं आकर बताया कि उसके नाम पर एक राजनीतिक नेता के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज की गई थी, जबकि उस नेता का उस मामले से कोई संबंध नहीं था।



