नई दिल्ली, 16 मार्च 2026।
उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल अरेस्ट के मामले पर सोमवार को सुनवाई को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई स्थगित करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वे आज ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे, जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई को एक सप्ताह के लिए टाल दिया। उच्चतम न्यायालय ने पहले 1 दिसंबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट और उससे जुड़े फर्जीवाड़ों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत जताई थी। कोर्ट ने इस फर्जीवाड़े से संबंधित मामलों की सीबीआई जांच का आदेश भी दिया था और साइबर क्राइम में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के मामले में बैंकरों की स्वतंत्र जांच की अनुमति दी थी।
कोर्ट ने रिजर्व बैंक को निर्देश दिए थे कि संदेहास्पद खातों की पहचान और उन्हें फ्रीज करने में एआई या मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा सके। उन राज्यों को भी निर्देश दिए गए थे जिन्होंने सीबीआई जांच की अनुमति नहीं दी थी कि वे डिजिटल अरेस्ट मामलों में जांच की अनुमति दें।
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, निवेश फर्जीवाड़ा और पार्ट टाइम जॉब के नाम पर फर्जीवाड़ा जैसे तीन प्रकार के साइबर अपराध हो रहे हैं। कोर्ट ने इस पर ध्यान दिया कि ऐसे अपराधों में पीड़ितों को बड़ी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता है। 17 अक्टूबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और केंद्र व सीबीआई को नोटिस जारी किया था।
अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने की घटना पर भी कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। बुजुर्ग दंपति ने तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने जालसाजी के बारे में बताया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अकेला नहीं है और न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी, निर्दोष लोगों से जबरन वसूली और लूट जैसे अपराधों के खिलाफ केंद्र और राज्यों की पुलिस को समन्वय करने की आवश्यकता है।
पत्र में बुजुर्ग दंपति ने कहा कि 3 से 16 सितंबर के बीच उनके खिलाफ जाली अदालती आदेश पेश किए गए और बैंक लेनदेन के माध्यम से एक करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई। महिला ने बताया कि कुछ लोगों ने ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए कोर्ट के आदेश दिखाए।



