नई दिल्ली, 12 फरवरी।
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'घूसखोर पंडित' के निर्माताओं को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जा सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि फिल्म का नाम बदलने के लिए हलफनामा दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान समाज में पहले से ही अशांति है और ऐसे विवादास्पद नाम माहौल को और बिगाड़ सकते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है और उस पर उचित प्रतिबंध लागू होते हैं। किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
याचिका अतुल मिश्रा ने दायर की थी, जिसमें कहा गया कि यह फिल्म विशेष समुदाय को टारगेट करने का प्रयास कर रही है। इसके पहले 10 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान निर्माताओं ने फिल्म का नाम बदलने का आश्वासन दिया था।



