संभागीय मुख्यालय पर बैठे एक बड़े साहब इन दिनों अपने सभी जिलों और थानों को फरमानों के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। रोज नए-नए आदेश जारी हो रहे हैं, लेकिन हाल यह है कि एक फरमान पर अमल शुरू हो, उससे पहले ही दूसरा फरमान सामने आ जाता है।
नतीजा यह है कि अधिकारी और थाना प्रभारी दोनों ही उलझन में हैं कि आखिर पहले किस आदेश पर अमल करें। साहब चाहते हैं कि सब कुछ उनके हिसाब से चले, लेकिन फरमानों की इतनी भरमार हो गई है कि कोई भी उन्हें पूरी तरह निभा नहीं पा रहा। अब चर्चा यह भी है कि रोज-रोज के फरमानों से परेशान कई थाना प्रभारी साहब की रवानगी का इंतजार कर रहे हैं।



