भोपाल, 28 फरवरी 2026।
बोत्सवाना से आठ चीतों का नया जत्था आज मध्यप्रदेश पहुंच रहा है, जिन्हें केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ेंगे। इस पहल से भारत में चीतों की संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी। जनसंपर्क अधिकारियों के अनुसार, चीता परियोजना के तहत श्योपुर जिले स्थित कूनो पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा समूह लाया जा रहा है। बोत्सवाना से एयरलिफ्ट कर लाए जा रहे इन आठ चीतों में छह मादा और दो नर शामिल हैं, जिन्हें विशेष विमान से भारत लाया जा रहा है। कूनो एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण में इतिहास रचने की तैयारी में है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव सुबह नई दिल्ली से विशेष विमान द्वारा ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से वे हेलीकॉप्टर से कूनो राष्ट्रीय उद्यान जाएंगे और सुबह करीब 10 बजे चीतों को पार्क के बाड़े में छोड़ेंगे। इसके बाद वे ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को इमिग्रेशन, कस्टम, पशु चिकित्सा और सुरक्षा औपचारिकताओं के बाद अंजाम दिया जा रहा है। सुबह 8:30 बजे ग्वालियर से वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों से चीतों को कूनो भेजा जाएगा और 9:30 बजे वे पार्क में पहुंचेंगे।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए विशेष हेलीपैड और सुरक्षित बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां उन्हें लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा। यह परियोजना 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई थी और इसके बाद से भारत में चीता पुनर्स्थापना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत में 39 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 36 कूनो और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं। इस परियोजना को वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और विस्तृत प्रबंधन योजना के तहत लागू किया जा रहा है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से समृद्ध है। यहां 174 प्रकार की पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 12 दुर्लभ श्रेणी की हैं। 1952 में भारत से एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद इन्हें पुनः बसाने की योजना शुरू हुई थी। वन्यजीव विशेषज्ञों की सिफारिश पर दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने का निर्णय लिया गया था। कूनो पार्क में चीतों के रहने के लिए 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र उपयुक्त माना गया है, जबकि आसपास के तीन हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र उनके स्वच्छंद विचरण के लिए उपयुक्त है।
चीता परियोजना अब सफल प्रजनन चरण में प्रवेश कर चुकी है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 पूरी तरह स्वस्थ और स्थापित हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया, जो परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। दूसरी मादा चीता ने भी तीन शावकों को जन्म दिया है। कुछ चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि कुछ संरक्षित बाड़ों में सुरक्षित हैं।



