भोपाल, 28 फरवरी 2026।
मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का स्वागत किया गया। बोत्सवाना से 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद 9 नए चीते शनिवार सुबह कूनो पहुंचाए गए। इन चीतों के आने से देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है। वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इन चीतों को विशेष सुरक्षा प्रबंधों के बीच क्वारंटीन बाड़ों में शिफ्ट किया गया।
जानकारी के अनुसार पहले बोत्सवाना से 8 चीते लाने की योजना थी, लेकिन शनिवार सुबह विशेष विमान से कुल 9 चीते ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचे। इनमें 6 मादा और 3 नर चीते शामिल थे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से लगभग 9:30 बजे सभी चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया, जहां उन्हें सीधे क्वारंटीन बाड़ों में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित कर दिया गया।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री खुद कूनो पहुंचे और उन्होंने क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। बाकी चीतों को वन विभाग की प्रशिक्षित टीम ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया। अधिकारियों का कहना है कि हर चीते की निगरानी विशेष रूप से की जा रही है।
कूनो में पहले 26 वयस्क चीते थे, जिनमें 14 नर और 12 मादा थे। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्क चीतों की संख्या 35 हो गई है, जिनमें 18 मादा और 17 नर चीते शामिल हैं। पहले नर चीतों की संख्या अधिक थी, लेकिन इस नई खेप के बाद संतुलन की स्थिति बदल गई है, जिससे आने वाले समय में प्रजनन की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और पर्यावरण के साथ अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसके बाद विशेषज्ञ समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। हर चीते को जंगल में छोड़ने से पहले उसके शिकार कौशल और इंसानी संपर्क से दूरी की बारीकी से जांच की जाती है।
अरावली पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित कूनो नेशनल पार्क में 174 प्रकार की पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इनमें 12 प्रजातियां दुर्लभ श्रेणी में हैं। कूनो नदी के किनारे फैली प्राकृतिक सुंदरता और मगरमच्छों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
भारत में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद 1952 से इन्हें फिर से बसाने की योजना पर काम चल रहा था। इसी उद्देश्य से 2009 में चीता संरक्षण विशेषज्ञों की बैठक में दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की गई थी।



