देहरादून, 09 मार्च।
उत्तराखंड के चौबटिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में 24 फरवरी से चल रहे भारत–जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ का समापन हो गया। इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत की और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन्स, शहरी युद्ध और मुश्किल इलाकों में कॉम्बैट ड्रिल्स में संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाई।
सातवें संस्करण का यह अभ्यास 24 फरवरी से 08 मार्च तक चला। वर्ष 2018 से भारत और जापान में बारी-बारी से आयोजित होने वाला यह वार्षिक अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साझा सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक आतंकवाद की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इसका महत्व और बढ़ गया है।
अभ्यास के समापन समारोह में भारत और जापान की सेनाओं के बीच गहन संयुक्त प्रशिक्षण की सफल परिणति का जश्न मनाया गया। अभ्यास ने भारत और जापान के सामरिक संबंधों को और सुदृढ़ किया और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और उन्नत रक्षा सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
सेना ने बताया कि अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं के जवानों ने संयुक्त प्रशिक्षण लेकर पारस्परिक संचालन क्षमता और अभियान दक्षता को सशक्त किया। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस काउंटर इंसर्जेंसी, काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन, शहरी युद्ध कौशल और जटिल भूभाग में युद्धाभ्यास पर रहा। इसके साथ सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, परिचालन विधियों और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।
अभ्यास ने शारीरिक क्षमता, फायरिंग कौशल और फील्डक्राफ्ट में सुधार किया। आपसी संवाद और एक-दूसरे की परंपराओं व संस्कृति से परिचय के माध्यम से सौहार्द बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
अभ्यास का प्रमुख आकर्षण ‘आसाही शक्ति’ एक्सरसाइज रहा। इसे 48 घंटे के फील्ड अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें आतंकवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया गया। इसमें भूभाग विश्लेषण, कंपनी ऑपरेटिंग बेस स्थापना, गश्त एवं खुफिया जानकारी एकत्र करना, कॉर्डन एंड सर्च, विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन, रूम इंटरवेंशन और बंधक मुक्ति अभ्यास शामिल थे। ड्रोन और आधुनिक निगरानी तकनीकों का उपयोग स्थिति की बेहतर समझ और समन्वय बढ़ाने के लिए किया गया।
समापन समारोह में जेजीएसडीएफ की प्रथम डिवीजन के उप कमांडिंग जनरल मेजर जनरल त्सुनेहिरो यानागिदा और भारतीय सेना के 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल सुधांशु शर्मा मौजूद रहे। अभ्यास ने भारत–जापान रक्षा साझेदारी के सुदृढ़ संबंधों और साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रदर्शित किया।



