तेहरान, 13 मार्च 2026।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज 14वां दिन है। इस संघर्ष की वजह से क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस के भंडार पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के सबसे ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि यदि देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमला किया गया तो वह इस क्षेत्र के तेल और गैस भंडार को आग के हवाले कर देगा।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में क्षेत्र के सभी तेल और गैस भंडार में आग लगा दी जाएगी। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा। वहीं, हाल ही में चुने गए ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में कहा कि यह जलमार्ग "दबाव के एक हथियार" के रूप में बंद रहेगा।
मोजतबा खामेनेई का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि नए सर्वोच्च नेता सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा नहीं दिखा सकते। 28 फरवरी के हमले में वह बुरी तरह घायल हो चुके हैं। उनके बयान को सरकारी टीवी पर किसी और से पढ़वाया गया और उनका चेहरा नहीं दिखाया गया।
आईआरजीसी की अहमियत की वजह
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को ईरान की सबसे ताकतवर और विशिष्ट सैन्य शाखा माना जाता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश के इस्लामी शासन की सुरक्षा के लिए इसका गठन किया गया था। आईआरजीसी केवल सैन्य बल नहीं है, बल्कि ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में भी गहरा प्रभाव रखता है।
ईरान में दो तरह की सेना है। पहली नियमित सेना है जिसे आर्टेश कहा जाता है और यह आमतौर पर सीमाओं की सुरक्षा करती है। दूसरी आईआरजीसी है, जो मुख्य रूप से सत्ता और क्रांति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रति जवाबदेह है, न कि निर्वाचित सरकार के प्रति। आईआरजीसी के पास अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना है।
आईआरजीसी की दो प्रमुख शाखाएं हैं। पहली कुद्स फोर्स, जो विदेशों में ईरान के अभियानों और मिलिशिया समूहों जैसे हिजबुल्लाह और हमास का समर्थन करती है। दूसरी बासिज अर्धसैनिक स्वयंसेवी बल है, जो देश में विरोध प्रदर्शनों को दबाने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रयोग किया जाता है। 29 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया था, जबकि इससे पहले अमेरिका भी इसे आतंकी समूह घोषित कर चुका है।



