नई दिल्ली, 27 फरवरी 2026।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय बजट किसी अल्पकालिक व्यापार दस्तावेज की तरह नहीं होता, बल्कि यह देश के विकास का नीतिगत रोडमैप होता है। उन्होंने कहा कि बजट का मूल्यांकन केवल तत्काल लाभ के आधार पर नहीं बल्कि उसमें निहित नीतिगत प्रयासों और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बजट के बाद आयोजित वेबिनार “विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सुधार और वित्त” को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को देश में ढांचागत सुविधाओं के विस्तार, धन प्रवाह को मजबूत बनाने, जीवन स्तर में सुधार, पारदर्शी शासन व्यवस्था और लोगों के लिए नए अवसर सृजित करने के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश सुधारों की तेज गति पर आगे बढ़ रहा है और इस गति को बनाए रखने के लिए नीतिगत मंशा और उसके परिणामों पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और डेटा विश्लेषण तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शिकायत निवारण प्रणालियों के माध्यम से नीतियों के प्रभाव की लगातार निगरानी भी आवश्यक है।
उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे सरकार द्वारा विकसित की जा रही ढांचागत सुविधाओं में निवेश के अवसरों का लाभ उठाएं। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में ढांचागत विकास के लिए बजट दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर बारह लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो निजी क्षेत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि परियोजनाओं की मंजूरी और मूल्यांकन प्रक्रिया को मजबूत बनाना चाहिए ताकि समय और धन की बर्बादी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि लागत-लाभ और परियोजना की पूरी अवधि की लागत पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने बॉन्ड बाजार में सुधार कर दीर्घकालिक विकास, आर्थिक स्थिरता और विदेशी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।



