काठमांडू, 27 फरवरी 2026।
नेपाल में चुनाव से पहले जनमत सर्वेक्षण शैली में प्रकाशित सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई ऑनलाइन मीडिया संस्थानों ने निर्वाचन आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए चुनाव परिणामों के अनुमान प्रकाशित किए, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
अधिवक्ताओं आभास रेग्मी, आयुष बडाल और आकाश ढकाल की ओर से संयुक्त रूप से दायर याचिका में प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, निर्वाचन आयोग और प्रेस काउंसिल सहित संबंधित मीडिया संस्थानों के मालिकों और संपादकों को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि कुछ मीडिया संस्थानों ने विभिन्न जिलों के उम्मीदवारों की जीत-हार का पूर्वानुमान प्रकाशित किया, जो आचार संहिता के प्रावधानों के खिलाफ है।
याचिका के अनुसार आचार संहिता में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से मतदान समाप्त होने तक किसी भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल के संभावित परिणामों के संबंध में जनमत सर्वेक्षण या उसके परिणाम प्रकाशित करने पर रोक है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्लेषण के नाम पर मतदाताओं की व्यक्तिगत राय सार्वजनिक करने से गोपनीयता अधिकार का उल्लंघन होता है।
इसके साथ ही यह भी दावा किया गया है कि संविधान में प्रदत्त गोपनीय मतदान के अधिकार पर असर पड़ने की संभावना है। याचिका में कहा गया है कि ऐसे प्रकाशनों से मतदाताओं की मानसिकता प्रभावित हो सकती है और चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग और प्रेस काउंसिल ऐसे मामलों को रोकने में प्रभावी कदम उठाने में विफल रहे हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि ऐसी समाचार सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।



