नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दैनिक जीवन में अनुशासन और ज्ञान की परंपरागत जड़ों के महत्व पर जोर देते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह सुभाषित पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने जीवन में ज्ञान, धर्म और कर्तव्य के संतुलन को महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित था —
“विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्। तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥”।
इसका भावार्थ यह है कि एक विद्वान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है, जहां ज्ञान रूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना मानी जाती है। वेदों को उस वृक्ष की शाखाएं और सत्कर्म को उसके पत्तों के रूप में दर्शाया गया है।
संदेश में कहा गया है कि जीवन की मूल जड़ यानी अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यदि जड़ कमजोर हो जाए तो शाखाएं और पत्ते भी सुरक्षित नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री के इस संदेश को सामाजिक मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। यह विचार जीवन में नैतिक मूल्यों और नियमित साधना की महत्ता को रेखांकित करता है।



