नई दिल्ली, 11 मार्च।
सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर अचेत अवस्था में हैं, को इच्छा मृत्यु का अधिकार प्रदान किया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने 100% दिव्यांग हरीश राणा के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट बंद करने की मंजूरी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को निर्देश दिया कि हरीश राणा को पैलिएटिव केयर में रखा जाए, ताकि चिकित्सा उपचार को सुरक्षित और गरिमापूर्ण तरीके से बंद किया जा सके। कोर्ट ने इच्छा मृत्यु पर विस्तृत कानून बनाने की अनुशंसा भी की। हरीश के माता-पिता, जिन्होंने अपने बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी, ने ही इस प्रक्रिया की मांग की थी।
इस प्रक्रिया में मरीज को जीवित रखने वाले आर्टिफिशियल सपोर्ट को हटाकर उसे प्राकृतिक तरीके से मरने दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि 09 मार्च 2018 को पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इच्छा मृत्यु की वसीयत को मान्यता दी थी। संविधान पीठ के अनुसार, हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक मृत्यु का अधिकार है और यह अधिकार संविधान की धारा 21 के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है।



