नई दिल्ली, 11 मार्च।
उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का एक अध्याय लिखने के जिम्मेदार लोगों को सरकारी कामों से हटाने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के खिलाफ यह कदम उठाया। अदालत ने कहा कि या तो इन लोगों को न्यायपालिका के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी या उन्होंने इसे जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया। पीठ ने बताया कि इन लोगों का उद्देश्य आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करना था। अदालत ने यह भी कहा कि आठवीं कक्षा सीखने की कच्ची उम्र होती है और इस तरह की सामग्री बच्चों की धारणा पर गलत प्रभाव डाल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी को किताब पर रोक लगा दी थी और कहा था कि इसमें गहरी साजिश शामिल है। कोर्ट ने एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को आदेश दिया कि किताब की सभी प्रतियों को हर जगह हटाया जाए और इसकी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किताब का ऑनलाइन या फिजिकल शेयर करना आदेश की अवमानना माना जाएगा। अदालत ने कहा कि यह किताब न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने 25 फरवरी को चीफ जस्टिस की बेंच के सामने मामले को मेंशन किया और चिंता जताई। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।



