नई दिल्ली, 03 मार्च 2026।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस हालात का नकारात्मक प्रभाव भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है। फाइनेंशियल इनफॉर्मेशन सर्विस देने वाली और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ग्रुप की इकाई बीएमआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है। साथ ही इस जियो-पॉलिटिकल तनाव से निवेशकों का मनोबल भी कमजोर हो सकता है, जिससे यूरोपीय यूनियन सहित अन्य देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) और अमेरिका के साथ प्रस्तावित संशोधित ट्रेड डील से मिलने वाला संभावित लाभ आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।
बीएमआई की नवीनतम इंडिया आउटलुक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 में अब तक नीतिगत अनिश्चितता अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने तथा ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर जवाबी हमलों के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलती दिख रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने से नीतिगत अनिश्चितता में इजाफा हो सकता है। जैसे-जैसे संघर्ष तेज होगा, अनिश्चितता भी बढ़ेगी, जिससे वैश्विक निवेशक हतोत्साहित हो सकते हैं। इसका सीधा असर भारत में आने वाले निवेश पर पड़ेगा। निवेश घटने की स्थिति में यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौतों से मिलने वाले संभावित लाभ पर भी असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर लगातार हमले किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई सहित कई प्रमुख नेताओं की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार केंद्रों को ड्रोन और मिसाइल हमलों से निशाना बनाया। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को संभावित हमले की चेतावनी भी दी है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है। बीएमआई की रिपोर्ट के मुताबिक यदि इस मार्ग से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो ऊर्जा क्षेत्र पर गहरा असर पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में 0.50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
करीब 33 किलोमीटर लंबे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति होती है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने जहाजों को इस मार्ग से दूर रहने की चेतावनी दी है। इसके चलते बीमा कंपनियों ने भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा कवरेज वापस लेने की घोषणा की है, जिससे भारत सहित कई देशों के लिए तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी कुल जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में तेजी और हॉर्मुज मार्ग से आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है, जिसका असर आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई देगा।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने हाल के समय में कई देशों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, जिससे आर्थिक वृद्धि को सकारात्मक बल मिल सकता है। बीएमआई ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बनी सहमति का जिक्र करते हुए बताया कि अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इसी बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द करने का आदेश दिया।
कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू करने की घोषणा की। इसके अगले दिन 25 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही, हालांकि इस संबंध में अभी औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के अलावा भारत ने यूरोपीय यूनियन और कुछ अन्य देशों के साथ भी हाल में एफटीए को अंतिम रूप दिया है। कानूनी मंजूरी के बाद इन समझौतों के अगले एक वर्ष में लागू होने की संभावना है। बीएमआई का कहना है कि यदि ये व्यापार समझौते सफलतापूर्वक लागू होते हैं, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर मौजूदा अनुमान से ऊपर जा सकती है। हालांकि इन सकारात्मक प्रभावों की सीमा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव कितने समय तक जारी रहता है और तेल आपूर्ति पर उसका कितना असर पड़ता है।



