पटना, 06 फरवरी।
बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को विधानसभा में सरकार ने विधायकों, विधान पार्षदों, सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा देने की घोषणा की। इस फैसले से राज्य के लगभग 10 लाख कर्मचारी और उनके परिवार लाभान्वित होंगे।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को लेकर सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लागू रीइंबर्समेंट व्यवस्था अव्यावहारिक है और मरीजों को इलाज के लिए पहले पैसे खर्च करने पड़ते हैं। कई बार जरूरी जांच के लिए भी भुगतान करना पड़ता है, जो गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए मुश्किल पैदा करता है।
इस पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को बताया कि सरकार कैशलेस सुविधा लागू करने के पक्ष में है और इस दिशा में जल्द निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार इसे दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। चर्चा के दौरान भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने भी सदस्यों को इलाज के दौरान हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया।
लगातार सवालों और दबाव के बीच उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में ही कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू करने की घोषणा कर दी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर बैठक कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
स्वास्थ्य खर्च को लेकर विधायक आईपी गुप्ता ने बिहार में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय कम होने का मुद्दा उठाया। इस पर प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बजट में लगातार बढ़ोतरी की है। वर्ष 2019-20 में स्वास्थ्य पर 8,477 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 में बढ़कर 15,488 करोड़ रुपये हो गए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए नई नीति लाई जा रही है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए पीपीपी मॉडल अपनाने और सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए भी नीति बनाने की तैयारी है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार उसकी प्राथमिकता है और कैशलेस इलाज की सुविधा इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।



