भोपाल, 14 फ़रवरी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज की फर्स्ट ईयर की छात्रा रोशनी कलैश की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर कॉलेज परिसर में तनाव और छात्रों के आक्रोश को जन्म दिया है। 10 फरवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में है और शुक्रवार की रात पुलिस की कार्रवाई ने स्थिति और बिगाड़ दी।
शुक्रवार दोपहर रोशनी की मौत के बाद परिजनों और मेडिकल छात्रों ने कोहेफिजा थाना का घेराव किया और जांच में ढिलाई का आरोप लगाया। रात करीब 11:30 बजे पुलिस पूछताछ के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल डी-ब्लॉक पहुंच गई। छात्राओं का आरोप है कि पुलिस बिना वारंट और लिखित आदेश के हॉस्टल में दाखिल हुई, जिससे हॉस्टल और पुलिस के बीच बहस शुरू हो गई। यह विवाद रात करीब 2 बजे तक चला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्राएं पुलिस से लिखित अनुमति दिखाने की मांग करती नजर आईं। मौके पर मौजूद एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित ने कहा कि पुलिस को हर बार अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक अनुमति उनके पास मौजूद थी।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब फर्स्ट ईयर की एक अन्य छात्रा से लंबी पूछताछ की गई। लगभग एक घंटे तक अलग कमरे में बयान दर्ज किया गया। छात्रों का कहना था कि देर रात यह कार्रवाई अनुचित है। विरोध बढ़ने पर रात करीब 1 बजे महिला कॉन्स्टेबल बुलाई गई। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि छात्राओं को परेशान करने और किसी को जबरन थाने ले जाने की कोशिश की गई। पुलिस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कार्रवाई केवल जांच का हिस्सा थी।
बता दें कि रोशनी कलैश, जो मूल रूप से आलीराजपुर की रहने वाली थी, पिछले साल अक्टूबर में एमबीबीएस में दाखिल हुई थी और कोहेफिजा थाना क्षेत्र के प्राइवेट पीजी में रहती थी। 10 फरवरी की सुबह वह कमरे से बाहर नहीं निकली। सहपाठियों ने दरवाजा खटखटाया और फोन किया, कोई जवाब नहीं मिलने पर गार्ड को बुलाया। कमरे और बाथरूम का दरवाजा तोड़ने पर रोशनी अचेत अवस्था में मिली। पास में खाली एसिड की बोतल पड़ी थी। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
छात्राओं का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई डराने और आंदोलन दबाने के प्रयास में थी, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अब जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता भी इसी मामले में बड़ा सवाल बन गई है।



