बांदा, 17 फ़रवरी।
बांदा ज़िला के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग तलहटी में 18 बीघा भूमि पर ‘ऋषिकुल वैदिक विलेज’ बहुआयामी परियोजना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाएगी। कुल लागत ₹30 करोड़, प्रत्येक चरण ₹5 करोड़। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल में पूंजीपति, इंजीनियर, शिक्षक और आम जनता निवेश कर सकेंगे। परियोजना स्थल खसरा संख्या 1082, 1083, 1084 और 1088।
प्रोजेक्ट पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश—पर आधारित होगा। सुविधाओं में ध्यान मंडप, सरस्वती वैदिक केंद्र, नक्षत्र डेक, आवासीय क्लस्टर, हाइड्रोथेरेपी पूल, पंचकर्म हीलिंग यूनिट, यज्ञशाला और कम्युनिटी एम्फीथिएटर शामिल। सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
परियोजना आध्यात्मिक, वेलनेस और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगी। कृषि, बागवानी, पारंपरिक हस्तशिल्प और आतिथ्य के माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। पंचधातु नानाजी देशमुख प्रतिमा परियोजना की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी।



