काठमांडू, 16 फरवरी।
काठमांडू में वायु प्रदूषण में तेज वृद्धि दर्ज की गई है और यह इस समय वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। भारत की दिल्ली 229 एक्यूआई के साथ पहले स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान का लाहौर 203 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर है।
काठमांडू में मंगलवार दोपहर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 191 तक पहुंच गया, जो सोमवार को 178 था। यह स्तर सभी के लिए अस्वस्थ श्रेणी में आता है, जिससे विशेष रूप से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और श्वसन या हृदय रोगों से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं। एक्यूआई मानकों के अनुसार 0–50 अच्छा (हरा), 51–100 सतर्कता आवश्यक (पीला), 101–150 संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ, 151–200 सभी के लिए अस्वस्थ, 201–300 अत्यंत अस्वस्थ और 300 से ऊपर खतरनाक माना जाता है।
पर्यावरण विभाग के महानिदेशक ज्ञानराज सुवेदी ने चेतावनी दी कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा नहीं हुई तो प्रदूषण और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि बारिश हवा में धूल और कणों को बैठाने में मदद करती है, इसलिए लंबे समय तक शुष्क मौसम रहने पर प्रदूषण बढ़ सकता है। सुवेदी ने संबंधित निकायों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उपाय लागू करने की सलाह दी। उन्होंने वाहनों की बढ़ती संख्या, डीज़ल और पेट्रोल का धुआं, सड़क व अवसंरचना परियोजनाओं से उठने वाली धूल, वनाग्नि और लंबे समय तक शुष्क मौसम को प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण बताया और चेताया कि समय पर कदम न उठाए जाने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
काठमांडू वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्ययोजना–2076 के तहत नेपाल सरकार एक्यूआई 300 से अधिक होने पर इसे आपदा मानती है। इसमें खुले में कचरा जलाने पर रोक, झाड़ू और वैक्यूम क्लीनर जैसी सड़क सफाई मशीनों का उपयोग बढ़ाना तथा बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और रोगियों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी करना शामिल है।
राष्ट्रीय पर्यावरण नीति के अनुसार वायु, जल, मृदा, ध्वनि, विद्युतचुंबकीय तरंगों, रेडियोधर्मी उत्सर्जन और खतरनाक रसायनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय मानकों का निर्माण और क्रियान्वयन अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और उच्च-जोखिम वाले इलाकों में निगरानी केंद्र स्थापित कर वायु, जल और ध्वनि की गुणवत्ता का मानचित्रण करने का प्रावधान भी है।



