यमुनानगर, 14 फ़रवरी।
खेल प्रतिभाओं से भरे यमुनानगर जिले को वर्तमान में प्रशिक्षकों की कमी ने चुनौतीपूर्ण स्थिति में डाल दिया है। इसका असर हाल ही में पलवल और गुरुग्राम में आयोजित मुख्यमंत्री कप प्रतियोगिता में साफ दिखाई दिया, जहां जिले के 156 खिलाड़ियों ने छह खेलों में भाग लिया, लेकिन कोई भी खिलाड़ी पदक नहीं जीत पाया। जानकारी के अनुसार कई खिलाड़ी बिना नियमित मार्गदर्शन के ही प्रतियोगिता में उतरे। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी स्तर पर सफलता के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और रणनीतिक तैयारी जरूरी होती है, जिसकी कमी प्रदर्शन में साफ झलकी। खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान पेशेवर सहयोग न मिल पाने से उनकी तैयारी प्रभावित रही।
जिले में सरकारी प्रशिक्षक सीमित खेलों तक ही उपलब्ध हैं। कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, कबड्डी, बॉक्सिंग, जूडो, भारोत्तोलन, खो-खो, तलवारबाजी और लॉन टेनिस के कोच कार्यरत हैं, जबकि एथलेटिक्स और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों में प्रशिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। तेजली स्टेडियम में खेलो इंडिया के अंतर्गत लघु शूटिंग केंद्र संचालित है, लेकिन अन्य खेलों के खिलाड़ी निजी संस्थानों पर निर्भर हैं। सरकारी स्तर पर संचालित 25 खेल नर्सरियों में भी संसाधनों और प्रशिक्षकों की सीमाएं सामने आ रही हैं।
दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए नियमित प्रशिक्षण पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके विपरीत जिले में निजी खेल अकादमियों की संख्या लगभग 60 तक पहुंच चुकी है, जहां करीब तीन हजार खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
जिला खेल अधिकारी शिल्पा गुप्ता ने स्वीकार किया कि प्रशिक्षकों की कमी से प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है और नए कोचों की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ने की उम्मीद है।



