मधेपुरा, 17 फरवरी।
बिहार सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के दावों के बीच कोसी प्रमंडल का प्रतिष्ठित जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गंभीर संकट से जूझ रहा है। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मेडिकल कॉलेज डॉक्टरों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद ‘आईसीयू’ जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
232 स्वीकृत चिकित्सक पदों के मुकाबले यहाँ केवल 51 डॉक्टर कार्यरत हैं, यानी महज 22 प्रतिशत पद भरे हैं। प्रोफेसर से लेकर सीनियर रेजिडेंट तक अधिकांश पद खाली पड़े हैं। 23 विभागों वाले इस संस्थान में प्रोफेसर के 23 पदों में सिर्फ 3, एसोसिएट प्रोफेसर के 43 में 7 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 76 में से मात्र 10 ही उपलब्ध हैं।
डॉक्टरों पर इलाज, इमरजेंसी और मेडिकल छात्रों को पढ़ाने की तिहरी जिम्मेदारी है, जिससे न मरीजों को समुचित उपचार मिल पा रहा है और न ही छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। स्थिति यह है कि एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
हाल ही में कोसी प्रमंडल के आयुक्त राजेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान कमियों को स्वीकार किया और साफ-सफाई व चिकित्सकों की कमी पर चिंता जताई। इसके बावजूद सवाल कायम है—क्या जल्द नियुक्तियाँ होंगी या करोड़ों की यह परियोजना कागजों तक सीमित रह जाएगी?


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