न्यूयॉर्क, 10 मार्च।
संयुक्त राष्ट्रसंघ में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताते हुए गंभीर चिंता जताई। पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि अफगानिस्तान की धरती से संचालित आतंकवाद न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि पूरे पड़ोसी क्षेत्र के लिए खतरा है। उन्होंने दावा किया कि तालिबान तत्वों की तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), मजीद ब्रिगेड, अल-कायदा और दाएश खोरासान के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।
अहमद ने बताया कि सीमा पार से तालिबान के हमलों के बाद पाकिस्तान को हवाई हमले करना पड़े और देश में हजारों लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि तालिबान शासक आतंकवाद को पाल पोस रहे हैं और ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) जैसे आतंकवादी समूहों को अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली हुई है, जो सीमा पार से घुसपैठ कर आत्मघाती हमले कर रहे हैं।
पाकिस्तान ने बताया कि पड़ोसी होने के नाते उसने तालिबान अधिकारियों के साथ हमेशा अच्छा व्यवहार किया, मानवीय मदद पहुंचाई, दो-तरफ़ा व्यापार बढ़ाया और वीजा प्रणाली को आसान बनाया। इसके बावजूद तालिबान का रवैया नहीं बदला। अहमद ने अफसोस जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की बात भी अफगानिस्तान ने नहीं मानी और दोहा में तीन बार वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
अहमद ने हालिया हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में तेजी आई है और इन हमलों की योजना तालिबान शासन की निगरानी में अफगानिस्तान में बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि पिछले महीने किए गए आतंकवादी हमलों में 175 से ज्यादा बेगुनाह लोग मारे गए और इनमें तीन आत्मघाती हमले शामिल थे।



