रांची, 13 फरवरी ।
झारखंड उच्च न्यायालय ने राजधानी रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है, जिससे प्रभावित लोगों को तुरंत राहत मिली है। सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकल पीठ में हुई।
रौनक कुमार सहित 11 लोगों ने उच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जिस जमीन पर वे रहते हैं, उसके संबंध में उनके पास सेटलमेंट एग्रीमेंट है और उन्होंने इस जमीन पर कुल सवा करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
हस्तक्षेपकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मूल याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्य अदालत से छुपाए और उन्हें प्रतिवादी नहीं बनाया गया, जिससे वे अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके। अदालत ने सुनवाई के दौरान हेहल के अंचल अधिकारी (सीओ) को निर्देश दिया कि हस्तक्षेपकर्ताओं के आवेदन पर कोई आदेश पारित हुआ या नहीं, इसकी जानकारी न्यायालय को दें। अधिवक्ता गौरव राज ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पक्ष रखा। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
इससे पहले महादेव उरांव ने अपनी 48 डिसमिल जमीन खाली कराने की मांग की थी, जिस पर उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2024 में अंचल अधिकारी, हेहल को जमीन खाली कराने का निर्देश दिया था। हाल ही में जिला प्रशासन ने खादगढ़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों को तोड़ने का आदेश दिया था, जिससे स्थानीय निवासियों ने विरोध किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी थी और वर्षों से वहां घर बनाकर रह रहे हैं। कुल 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया था। उच्च न्यायालय की रोक के बाद फिलहाल उन्हें राहत मिली है और अदालत द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और अगली सुनवाई के बाद कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।



