कोलकाता, 25 फरवरी 2026
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने केंद्रीय बलों की तैनाती वाली गाड़ियों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) ट्रैकर लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य केंद्रीय बलों की आवाजाही और तैनाती पर लगातार निगरानी रखना तथा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार केंद्रीय बलों की तैनाती दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में अगले महीने की पहली तारीख से 240 कंपनियां राज्य में भेजी जाएंगी। इसके बाद दूसरे चरण में 10 मार्च से अतिरिक्त 240 कंपनियों की तैनाती की जाएगी। इस व्यवस्था से चुनावी सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि जीपीएस प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय प्रेक्षक बलों की गतिविधियों और मूवमेंट पर नजर रख सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बलों की तैनाती तय क्षेत्रों में प्रभावी रूप से हो और किसी भी शिकायत की स्थिति में तुरंत जांच की जा सके। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि केंद्रीय बल पहुंचने के बाद क्षेत्र में प्रभुत्व अभियान चलाएंगे और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित होंगे।
पहले चरण में भेजी जाने वाली 240 कंपनियों में 110 कंपनियां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की, 55 सीमा सुरक्षा बल की, 21 केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की, 27 भारत तिब्बत सीमा पुलिस की और 27 सशस्त्र सीमा बल की होंगी। दूसरे चरण में 240 कंपनियों में से 120 सीआरपीएफ, 65 बीएसएफ, 16 सीआईएसएफ, 20 आईटीबीपी और 19 एसएसबी की कंपनियां शामिल रहेंगी। आयोग ने यह कदम पिछले चुनावों में मिली सुरक्षा संबंधी शिकायतों को देखते हुए उठाया है, ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।



