शिमला जिला पुलिस ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करते हुए तीन सक्रिय आदतन नशा तस्करों को पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम के तहत तीन महीने की निवारक नजरबंदी में जेल भेज दिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई नशा तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से की है।
पहला आरोपी इंदर देव उर्फ दानु (41) निवासी मंधोरपाट को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दानु लंबे समय से नशा तस्करी में सक्रिय था और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2022 में बालूगंज थाना क्षेत्र में उससे 40.26 ग्राम हेरोइन और 16.35 ग्राम अफीम बरामद हुई थी। वर्ष 2023 में 18.55 ग्राम हेरोइन पकड़ी गई, जबकि 2024 में पंजाब के जिरकपुर में 60 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2025 में धर्मपुर (सोलन) में 2.47 ग्राम हेरोइन के साथ वह पकड़ा गया था। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ शिमला और अन्य जिलों में कुल 52 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें एनडीपीएस, आबकारी, चोरी, सेंधमारी, सड़क दुर्घटना और मारपीट के मामले शामिल हैं।
दूसरा आरोपी दीपक ठाकुर (35) निवासी नवबहार, छोटा शिमला को भी तीन महीने की जेल भेजा गया है। उसके खिलाफ 2021 में बालूगंज थाना क्षेत्र में 64.34 ग्राम हेरोइन और 2025 में संजौली में 5.480 ग्राम हेरोइन बरामद होने के मामले दर्ज हैं। तीसरा आरोपी संजीव कुमार उर्फ घोड़ा (34) निवासी ठियोग क्षेत्र को भी निवारक नजरबंदी में जेल भेजा गया है। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से नशा तस्करी में सक्रिय था और ढली थाना क्षेत्र में 2020 से 2025 के बीच उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं, जिनमें हेरोइन की बरामदगी शामिल है।
एसएसपी शिमला ने बताया कि पिछले 28 दिनों में डिटेंशन आदेशों के आधार पर कुल 21 आदतन और संगठित नशा तस्करों को तीन-तीन महीने के लिए जेल भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि निवारक नजरबंदी का उद्देश्य अवैध नशा कारोबार की कमर तोड़ना, संगठित गिरोहों को कमजोर करना और आरोपियों को दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकना है।



