नई दिल्ली, 16 मार्च 2026।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाले केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने देश में गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
इन निर्देशों को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 'राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों' को भेजा गया है। इनका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके अभिलेखों का सुरक्षित रखरखाव सुनिश्चित करना है।
सीएआरए ने स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 (संशोधित 2021) के तहत किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए 'कानूनी रूप से स्वतंत्र' घोषित करने से पहले सभी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना अनिवार्य है। अनाथ बच्चों के मामले में उचित जांच और माता-पिता का पता लगाने के प्रयास निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाने चाहिए। आत्मसमर्पित बच्चों के लिए अधिनियम में निर्धारित दो महीने की अनिवार्य पुनर्विचार अवधि का सख्ती से पालन किया जाएगा, जिसके बाद ही उन्हें गोद लेने की श्रेणी में रखा जाएगा।
दत्तक ग्रहण एजेंसियों (एसएए) या बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) के बंद या विलय होने की स्थिति में बच्चों के रिकॉर्ड खो जाने का खतरा रहता है। इसलिए सीएआरए ने निर्देश दिया है कि संस्थानों की परिचालन स्थिति चाहे जो भी हो, रिकॉर्ड सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेदारी रहेगी। अभिलेखों को नष्ट करना या फेंकना कानूनन अपराध है।
तीसरे निर्देश में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 का हवाला देते हुए बच्चों की पहचान उजागर करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। किसी भी बच्चे की तस्वीर, वीडियो या पहचान संबंधी जानकारी सोशल मीडिया या किसी सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं की जा सकती। गोपनीयता भंग करने वाले अधिकारियों या संस्थानों के खिलाफ धारा 74(3) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इन निर्देशों के माध्यम से सीएआरए का लक्ष्य दत्तक ग्रहण प्रणाली में जवाबदेही तय करना और बच्चों की गरिमा एवं अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्राधिकरण ने सभी राज्यों से इन नियमों का कड़ाई से अनुपालन करने का आग्रह किया है।



