हावड़ा, 19 फरवरी।
विवेकानंद विद्याविकास परिषद द्वारा हावड़ा में आयोजित ‘सप्तशक्ति संगम (मातृसम्मेलन)’ में मातृशक्ति की भूमिका, भारतीय सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण तथा बच्चों में सकारात्मक संस्कारों के संचार पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा और न्याय क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।
परिषद की चेयरमैन भगवती प्रसाद जालान, ट्रस्टी नरेंद्र नाथ डागा और प्रगति बंद्योपाध्याय सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्य अतिथि के रूप में कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस समाप्ति चट्टोपाध्याय और मुख्य वक्ता मधुश्री संजीव साव मंच पर रहीं। विशेष अतिथि के रूप में संस्कार भारती की अखिल भारतीय सचिव नीलांजना राय भी उपस्थित थीं।
मुख्य वक्ता मधुश्री साव ने कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु होती है और अच्छे नागरिक के निर्माण की जिम्मेदारी मातृशक्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने बच्चों में आत्मविश्वास, आत्मबोध और संस्कृति के प्रति गौरव का भाव विकसित करने पर जोर दिया। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने नारी शक्ति को सर्वाधिक सक्षम बताया है और महिलाओं को इसी दृष्टि से बच्चों को शिक्षित करना चाहिए।
मुख्य अतिथि जस्टिस समाप्ति चट्टोपाध्याय ने कहा कि बचपन में उन्होंने अपने बुजुर्गों से भारतीय संस्कृति और सभ्यता के उच्च आदर्श सीखे। उन्होंने मातृशक्ति और महिलाओं के योगदान को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई और संगीत तथा नृत्य के साथ इसकी प्रस्तुति जारी रही। राष्ट्र वंदन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



